गणगौर के दोहे
- गणगौर पर्व : मालवा-निमाड़
- गणगौर मालवा और निमाड़ का गौरवमय पर्व है। चैत्र माह की तीज को मनाया जाने वाला यह पर्व एक महोत्सव रूप में संपूर्ण मध्यप्रदेश निमाड़-मालवांचल में अपनी अनूठी छटा बिखेरता है। इसके साथ ही चैत्र माह में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में महाकाली, महागौरी एवं महासरस्वती अलग-अलग रूपों में नवरात्रि में पूजी जाती हैं।
पारिवारिक व सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है गणगौर का त्योहार। चैत्र गणगौर पर्व गणगौर दशमी से अथवा एकादशी से प्रारंभ होता है, जहां माता की बाड़ी यानी जवारे बोए जाने वाला स्थान पर नित्य आठ दिनों तक गीत गाए जाते हैं। यह गीत कन्याओं, महिलाओं, पुरुषों, बालकों के लिए शिक्षाप्रद होते हैं।
गणगोर को पानी पिलाते समय मजेदार दोहे बोले जातें हैं जिनमें अपने पति का नाम बताना होता है।
पहले आप दोहा बोलेंगे उसके बाद ही आपको गणगौर को पानी पिलाने दिया जाएगा ऐसा नियम होता है।
नाम के दोहै,name ke dohe ,
केवाडे in निमाड़
1. गोरे गोरे हाथों में पहना है कंगना,
पियाजी के लिए छोड़ा बाबुल का अंगणा । #yourcoco
2. क्या कहूं कैसे कहुं शर्म मुझे आती है ,
पियाजी मेरे हमेशा जीवनसाथी है।
3.गहनों में मेरे हिरे मोती जड़ें,
पियाजी के लिए अपने माँ बाप छोडे ।
4.चांदी की प्लेट में पान का बीड़ा,
पियाजी के राज में पहनु हिरे का चुडा ।
5.उठी हुई राधिका कन्हैया मनावे आज,
पियाजी मेरे प्रियतम और में हो गयी खास।
6. शब्द और अलंकार से बनती है कविता,
पियाजी है सागर में हं सरिता ।
7.खाना खाने बैठी हलवा गरमागरम ,
पियाजी का नाम लेने में काहे की शरम ।
8.चप्पल पहनु बाटा साडी पहनूं कोटा ,
पियाजी आफिस जाये तो मैं करू टाटा ।
9.दिल दिया दर्द लिया,
प्रियाजी के संग जिनका वादा किया ।
10.निले गगन के तले धरती का प्यार पले ,
पियाजी के साथ मेरी जीवन प्रशीत जसे ।
11.चांदी का ग्लास गंगाजल का पानी,
मुखड़ा धोये पियाजी की रानी ।
12.गरम गरम मालपुआ चेवर नहीं भाये ,
पियाजी गांव जाएं तो मोहे नींद नहीं आए ।
13.पहले थी मिस अब बन गयी हूं मिसेज ,
पियाजी का नाम लेने में क्या है विशेष ।
14.अंग्रेजी कानून देसी कायदा,
पियाजी का नाम पुछनेसे आपको क्या फायदा ।
15.आँखों को यूँ भा गया, उस का रूप अनूप ,
सर्दी में अच्छी लगे, जैसे कच्ची धूप ।
16.कैसे अपने प्यार के सपने हों साकार ,
तेरे मेरे बीच है, मज़हब की दीवार।
17.जाड़े की रुत है नई तन पर नीली शाल ,
तेरे साथ अच्छी लगी सर्दी अब के साल ।
18.मन के अंदर पिया बसे, पिया के अंदर प्रीत ,
खुद में इतना डूब जा मिल जाएगा मीत ।
19.सीतारो के झुंड में चांद एक है ,
लाखो की भीड मे पियाजी एक है ।
20. लहरे आती है और चली जाती है ,
मुझे पियाज़ी की याद हर वक्त आती है।
21.सुंदर कमल खिला मिट्टीमें,
ससुरजी के साथ पतिराज सासूमाँ के मुट्ठीमें ।
22.इंटरनेट की वज़ह से सब हुआ ईजी ,
पियाजी का नाम लेती हूँ बहु what's app पर बिझी।
23.नदी के किनारे ऊँचा पहाड़ ,
पति के खराटे जैसे शेर की दहाड़ ।
24.फ़ाउंटेन पेन में नीली सियाही,
पियाजी है ..(मायकेका उपनाम)..के जमाई ।
25.शादी के लिए पूछकर इन्होंने किया daring ,
पियाजी के जीवन का मेरे ही हात में steering ।
26.चांदी की कटोरी में खीर गरम गरम ,
पियाजी का नाम लेने में मुझे आती है शरम ।
27.क्या बताऊँ सखियों मैं हूँ किस हाल में ,
अटक गई मैं पियाजी के प्यार के जाल में ।
28.मेरे हाथों में है इनके जीवन की ,
डोरी गलती कोई भी करे पियाजी ही कहते हैं सॉरी।
29.चम्मच में चम्मच, चम्मच में घी ,
मेरा और पिया जी का एक ही जी ।।
30.चलता है रिक्शा उड़ती है धूल,
मैं पिया जी के लिए कमल का फूल ।
31.मटकी पे गिलास, गिलास में पानी,
मैं मेरे पिया की दिल की रानी |
32.मेरे हाथो में सोने का कंगना,
रोज बुहारू अपने पिया जी का अंगना ।
33.हम तो जाएंगे वृंदावन धाम,
मैं पिया जी की राधा और पिया मेरे श्याम ।
34.बरसात में जब आएगा सावन का महीना,
मैं पिया को बना लूंगी अंगूठी का नगीना ।
35.बजती हैं पायल बजते हे साज,
मेरे पिया की मीठी आवाज़ ।
36.डिब्बी में डिब्बी, डिब्बी में जीरा,
मैं पिया जी की अंगूठी का हीरा ।
37.पैर में चुभ गया बबूल का कांटा,
पिया जी ने कभी ना मारा मुझे चांटा ।
38. कच्चा पान भाता नहीं, पक्का पान खाती नहीं,
पिया जी से पूछे बिना कभी कहीं जाती नहीं।
39. टेबल पर प्लेट, प्लेट में केक,
मेरे पति पिया हैं करोड़ों में एक।
40. ईसर जी के सामने गौरा रूठे,
पिया जी और मेरा साथ कभी ना छूटे ।
. फिर गणगौर का प्रसिद्ध गीत गाते हैं -
पीयर को पेलो जड़ाव की टीकी,
मेण की पाटी पड़ाड़ वो चंदा...
कसी भरी लाऊं यमुना को पाणी...
हारी रणुबाई का अंगणा म ताड़ को झाड़।
ताड़ को झाड़ ओम म्हारी
देवि को र्यवास।
रनूबाई रनू बाई, खोलो किवाड़ी...।
पूजन थाल लई उभी दरवाजा
पूजण वाली काई काई मांग...
#your coco
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English translation:-
• Gangaur festival: Malwa-Nimar
Gangaur is the proud festival of Malwa and Nimar. This festival, which is celebrated on the Teej of Chaitra month, spreads its unique hue in the entire Madhya Pradesh Nimar-Malvanchal in the form of a festival. Along with this, Mahakali, Mahagauri and Mahasaraswati are worshiped in different forms during Navratri in different regions of the state in the month of Chaitra.
Gangaur festival is important from family and social point of view. Chaitra Gangaur festival starts from Gangaur Dashami or Ekadashi, where songs are sung daily for eight days at Mata ki Bari i.e. the place where barley is sown. These songs are educative for girls, women, men and children.
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